आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनीं थौलधार की प्रियंका बिष्ट, हर्बल टी के व्यवसाय से बनीं “लखपति दीदी”

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  • हौसलों की उड़ान : हर्बल टी व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं प्रियंका बिष्ट
  • स्वरोजगार की मिसाल : प्रियंका बिष्ट ने हर्बल टी से लिखी सफलता की नई कहानी
  • हर्बल टी से बदली जिंदगी, प्रियंका बिष्ट बनीं गांव की प्रेरणा

टिहरी : विकासखंड थौलधार के धरवाल गांव की निवासी प्रियंका बिष्ट ने यह साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और वित्तीय सहयोग मिले तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने हर्बल टी निर्माण का सफल व्यवसाय स्थापित किया और आज वे अपने क्षेत्र में “हर्बल टी वाली दीदी” तथा “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।

घर और खेती तक सीमित था जीवन

कुछ समय पहले तक प्रियंका बिष्ट का जीवन घर, खेती और पशुपालन तक ही सीमित था। परिवार की आय सीमित होने के कारण आर्थिक स्थिति सामान्य थी और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी भी उन्हें नहीं थी। वर्ष 2024 में उन्होंने ‘वेदावी स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की।

NRLM से मिली स्वरोजगार की दिशा

समूह की बैठकों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत उन्हें विभिन्न स्वरोजगार संभावनाओं की जानकारी मिली। इसी दौरान प्रियंका ने हर्बल टी निर्माण को अपने व्यवसाय के रूप में चुनने का निर्णय लिया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक जड़ी-बूटियों की उपयोगिता को समझते हुए इस क्षेत्र में कार्य शुरू किया।

वित्तीय सहयोग से शुरू हुआ उद्यम

व्यवसाय की शुरुआत के लिए प्रियंका को स्वयं सहायता समूह तथा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ। रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि (CIF) और बैंक ऋण की सहायता से उन्होंने अपना हर्बल टी उद्यम स्थापित किया। शुरुआती चुनौतियों और संघर्षों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।

वार्षिक आय 6.40 लाख रुपये तक पहुंची

आज प्रियंका बिष्ट का हर्बल टी व्यवसाय लगातार प्रगति कर रहा है। उनके उद्यम से वर्तमान में लगभग 800 किलोग्राम हर्बल टी का उत्पादन हो रहा है। इस व्यवसाय से उनकी वार्षिक आय बढ़कर 6.40 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच गई है। आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ उनके परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

20 से अधिक महिलाओं को दिया प्रशिक्षण

प्रियंका की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने क्षेत्र की 20 से अधिक महिलाओं को हर्बल टी निर्माण और स्वरोजगार से जुड़ने का प्रशिक्षण दिया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी पहल से ग्रामीण क्षेत्र में महिला उद्यमिता को नई दिशा मिली है।

सरकारी योजनाएं दे रहीं नई पहचान

प्रियंका बिष्ट की यह यात्रा दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण महिलाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और समाज में नई पहचान भी प्रदान कर रही हैं।

महिलाओं से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील

डीआरडीए परियोजना निदेशक ज्योति ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रियंका बिष्ट जैसी सफल महिलाएं इस बात का उदाहरण हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने जनपद की सभी महिलाओं से अपील की कि वे सरकार की विभिन्न आजीविका योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। जिला प्रशासन प्रत्येक इच्छुक महिला को योजनाओं से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी प्रियंका

प्रियंका बिष्ट की कहानी उत्तराखंड की उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने की इच्छा रखती हैं। सही दिशा, निरंतर प्रयास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कोई भी महिला आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

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