उत्तराखंड में कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू, स्रोत पर कचरा पृथक्करण से वैज्ञानिक निस्तारण तक व्यवस्था होगी मजबूत

by doonstarnews

देहरादून। स्वच्छ और कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ स्रोत पर पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुन: उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।

डॉ. धकाते ने बताया कि नए नियमों के तहत कचरे को चार श्रेणियों, गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे में अलग करना होगा। वहीं, 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत या 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा प्रतिदिन उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों को बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

दिसंबर तक लीगेसी वेस्ट निस्तारण का लक्ष्य

उन्होंने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। ये सेल शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन, डंपिंग साइट तथा पुराने जमा कचरे यानी लीगेसी वेस्ट के निस्तारण की निगरानी करेंगे। राज्य में लीगेसी वेस्ट का निस्तारण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

राज्य में फिलहाल लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को प्रभावी बनाने के लिए करीब 500 वाहनों में चार अलग-अलग कंपार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम भी लागू किया गया है।

रोजाना 1930 मीट्रिक टन कचरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन का रोजाना प्रसंस्करण किया जा रहा है। राज्य में प्लास्टिक कचरे का भी अलग से प्रसंस्करण किया जा रहा है।

कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, करीब 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर संचालित हैं।

अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आमजन की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुन: उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

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