ऑफिस वर्क में नहीं सताएगा गर्दन और पीठ का दर्द, बस बदल लें अपना बैठने का तरीका

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  • सर्वाइकल पेन से बचना है? लैपटॉप यूजर्स आज ही अपनाएं ये आसान पोस्चर और एक्सरसाइज

दिल्ली : आज की डिजिटल जीवनशैली में लैपटॉप और कंप्यूटर हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्क्रीन पर घंटों नजरें गड़ाए रखना आपकी रीढ़ की हड्डी और गर्दन के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? गलत पोस्चर के कारण ‘टेक नेक’ और सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं। अगर आप भी दिन भर डेस्क जॉब करते हैं और शाम होते-होते गर्दन-पीठ के दर्द से बेहाल हो जाते हैं, तो विशेषज्ञों की ये सलाह आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

क्यों होता है गर्दन में दर्द? (The Root Cause)

विशेषज्ञों के अनुसार, लैपटॉप की स्क्रीन आमतौर पर डेस्क पर नीचे की ओर होती है। इसे देखने के लिए जब हम अपनी गर्दन को आगे की ओर झुकाते हैं, तो गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसे ही ‘टेक नेक’ कहा जाता है। सही पोस्चर और थोड़े से बदलावों के साथ इस गंभीर समस्या को रोका जा सकता है।

आदर्श पोस्चर: कैसे बैठें डेस्क पर?

पीठ सीधी और कंधे रिलैक्स्ड रखने चाहिए। आपकी गर्दन को उचित सपोर्ट मिलना अनिवार्य है।

आई-लेवल स्क्रीन : कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन आपकी आंखों के ठीक सामने या थोड़ा नीचे होनी चाहिए, ताकि आपको सिर बार-बार ऊपर-नीचे न करना पड़े।

कोहनी का कोण : कीबोर्ड का स्थान ऐसा हो कि आपके हाथों की कोहनियां 90 से 100 के कोण पर रहें। इससे कंधों पर तनाव कम होता है।

लैपटॉप यूजर्स के लिए खास सलाह

अगर आप लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, तो लैपटॉप स्टैंड का उपयोग जरूर करें। चूंकि लैपटॉप की स्क्रीन नीचे होती है, स्टैंड इसे आंखों के लेवल पर ले आता है। इसके साथ ही एक एक्सटर्नल कीबोर्ड और माउस का इस्तेमाल करें ताकि आपके हाथ आरामदायक स्थिति में रहें।

नेक रेंज ऑफ मोशन एक्सरसाइज का जादू

मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलापन बनाए रखने के लिए रोजाना गर्दन की एक्सरसाइज करें:

  1. मूवमेंट: गर्दन को धीरे-धीरे आगे-पीछे और बाएं-दाएं घुमाएं।
  2. ब्रेक है जरूरी: हर 30 से 45 मिनट के काम के बाद अपनी सीट से उठें। थोड़ा टहलें और गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग करें।

इन छोटी बातों का रखें ख्याल

हमेशा ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जो आपकी पीठ को पूरा सपोर्ट दे।
– बैठते समय पैर फर्श पर सपाट रखें, उन्हें हवा में न लटकाएं।
– यदि दर्द पुराना है या बढ़ रहा है, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

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