- 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘देहरादून किताब कौतिक’ में बच्चों द्वारा तैयार पुस्तकों की लगेगी विशेष प्रदर्शनी
- पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मैती आंदोलन के अनुभवों को साझा किया
देहरादून : रविवार को अल्मोड़ा से प्रकाशित बाल पत्रिका ‘बालप्रहरी’, भारत ज्ञान विज्ञान समिति एवं देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में दून लाइब्रेरी, देहरादून में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित 5-दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में देहरादून के विभिन्न विद्यालयों के 45 बच्चों द्वारा तैयार की गई 15-15 पृष्ठों की हस्तलिखित पुस्तकें (जैसे- ‘बालप्रहरी’, ‘बाल ज्ञान’, ‘बालवाटिका’, ‘बाल मन’, ‘नई ज्योति’ आदि) विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित बाल कवि सम्मेलन में बच्चों ने बादल, पर्यावरण और मोबाइल के दुष्प्रभावों पर अपनी स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं। इसके अतिरिक्त, उदय किरौला द्वारा निर्देशित नुक्कड़ नाटक ‘मोबाइल टन टना टन टन’ के माध्यम से वर्तमान समय में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग पर कटाक्ष करते हुए नशा मुक्ति का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रकाशचंद्र पांडेय द्वारा संपादित दीवार पत्रिका ‘बाल अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने बच्चों को पर्यावरण व पेड़ों का महत्व बताते हुए प्रसिद्ध ‘मैती आंदोलन’ की पृष्ठभूमि से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाने के साथ-साथ एक संवेदनशील और अच्छा इंसान बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने बच्चों में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को विकसित करने पर बल दिया।
किताब कौतिक के आयोजक दयाल पांडेय ने बताया कि 23, 24 व 25 अक्टूबर को आयोजित होने वाले ‘देहरादून किताब कौतिक’ में देश-विदेश के साहित्यकारों की किताबों के साथ बच्चों की इन हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस अवसर पर प्रवीण भट्ट, कमलेश खंतवाल, मनोज पांडे, अदिति जमलोकी, डॉ. शशिकला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे


