रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास पर एहेड2025 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेज़बानी कर साक्ष्य-आधारित अनुसंधान के माध्यम से सार्वजनिक नीति, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों और सामाजिक प्रभाव को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया।
आईआईटी रुड़की की एहेड प्रयोगशाला द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से अग्रणी विद्वान, नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री और कार्यकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी समकालीन चुनौतियों एवं समाधानात्मक मार्गों पर विचार-विमर्श करना रहा।
डॉ. प्रताप सी. मोहंती द्वारा स्थापित और संचालित एहेड प्रयोगशाला ने वर्ष 2025 में अपना सातवाँ प्रमुख शैक्षणिक आयोजन आयोजित किया। सम्मेलन का संयोजन डॉ. प्रताप सी. मोहंती ने किया, जबकि डॉ. मनीष के. अस्थाना सह-संयोजक रहे। इसे भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन से, मेमोरी एंड एंग्ज़ायटी रिसर्च ग्रुप के सहयोग से समर्थन प्राप्त हुआ।
“स्वास्थ्य और विकास में वैश्विक व्यवधान: चुनौतियाँ, नवाचार और इक्कीसवीं सदी के लिए मार्ग” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलापन क्षमता, जलवायु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य, स्वास्थ्य वित्तपोषण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, तथा क्षेत्रीय असमानताओं जैसे विषयों पर नीति-प्रासंगिक अनुसंधान प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन में दस विषयगत ट्रैक शामिल रहे, जिनमें स्वास्थ्य वित्तपोषण, व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य, स्वास्थ्य व्यवहार, लैंगिक असमानताएँ, वृद्धावस्था एवं कल्याण, पोषण और मानव पूंजी, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ तथा संरचनात्मक असमानताएँ प्रमुख रहीं।
उद्घाटन सत्र को आईआईटी रुड़की के अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिष्ठाता प्रो. वी. सी. श्रीवास्तव, एम्स ऋषिकेश के हृदय रोग विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) भानु दुग्गल तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. स्मिता झा ने संबोधित किया। वक्ताओं ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य भाषण और आमंत्रित व्याख्यान प्रो. साबु पद्मदास (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन, यूके), डॉ. मार्गरेट त्रियाना (विश्व बैंक), डॉ. सुमन सेठ (यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स), प्रो. प्रकाश सी. कांडपाल तथा प्रो. दिब्येंदु मैती (दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स) द्वारा दिए गए। सम्मेलन में विश्व बैंक, यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम (अमेरिका), आईआईटी कानपुर, जेएनयू और बीएचयू सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी रही।
सभी शोध पत्रों को कठोर द्वि-अंध सहकर्मी समीक्षा प्रक्रिया से गुज़ारा गया। सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार डॉ. बसंत के. पांडा (पॉपुलेशन काउंसिल, भारत) और तनिषा (लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, यूके) को प्रदान किए गए।
समापन सत्र में घोषणा की गई कि एहेड सम्मेलन का अगला संस्करण 14 से 16 दिसंबर 2026 तक आईआईटी रुड़की में आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन के साथ-साथ मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग में “स्वास्थ्य और कल्याण में बड़े-पैमाने के डेटा विश्लेषण” विषय पर पाँच-दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं की डेटा-आधारित नीति विश्लेषण क्षमताओं को सुदृढ़ करना रहा।
एहेड2025 के माध्यम से आईआईटी रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में अकादमिक अनुसंधान, नीति निर्माण और सामाजिक प्रभाव के बीच सेतु बनाने वाले राष्ट्रीय ज्ञान साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया।
