- श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय और स्पीकिंगक्यूब के संयुक्त तत्वावधान में हुआ ऑनलाइन FDP, शोध की गुणवत्ता और उपयोगिता पर दिया जोर
देहरादून। श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय (SDSUV) एवं स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मेंटल हेल्थ कंसल्टिंग फाउंडेशन, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “शोध की आधारभूत अवधारणाएँ” विषय पर संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) आयोजित किया गया। ऑनलाइन माध्यम से शाम 6:30 बजे से रात 9 बजे तक आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों और शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शोध पद्धति की समझ को मजबूत करने के साथ उद्देश्यपूर्ण एवं सार्थक अकादमिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना रहा।
शोध की गुणवत्ता और व्यावहारिक उपयोगिता पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहथौल, टिहरी गढ़वाल के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने शोध के व्यापक उद्देश्य और मूल भावना पर विचार रखे। उन्होंने भारत में शोध की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में अकादमिक अनुसंधान की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और व्यावहारिक उपयोगिता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संकाय सदस्यों और पीएचडी शोधार्थियों से स्पष्ट उद्देश्य, शोध में कठोरता और उपयोगी परिणामों को केंद्र में रखकर अनुसंधान करने का आह्वान किया।
शोध क्षमता निर्माण के लिए सहयोगात्मक कार्यक्रम जरूरी
स्वागत संबोधन में डॉ. दीपिका चमोली शाही ने आयोजनकर्ता संस्थाओं का परिचय देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संकाय सदस्यों एवं पीएचडी शोधार्थियों के बीच शोध की आधारभूत समझ विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शोध ज्ञान के सृजन, सामाजिक चुनौतियों के समाधान तथा अकादमिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने शोध क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए ऐसे सहयोगात्मक शैक्षणिक कार्यक्रमों को उपयोगी बताया।
शोध-उन्मुख पहलों को संस्थागत समर्थन
कार्यक्रम में प्रो. एम. एस. रावत, निदेशक, पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ने संरक्षक के रूप में सहभागिता की। उनकी उपस्थिति को विश्वविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों और शोध-उन्मुख पहलों को मिल रहे संस्थागत समर्थन के रूप में रेखांकित किया गया।
शोध पद्धति की व्यवस्थित समझ जरूरी
प्रो. (डॉ.) गुलशन कुमार ढींगरा, प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान विभाग एवं निदेशक, आईक्यूएसी, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ने शोध पद्धति पर संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित करने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने संकाय सदस्यों और शोधार्थियों को शोध के सिद्धांतों, विभिन्न शोध पद्धतियों और व्यवस्थित अनुसंधान प्रक्रिया की समुचित समझ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बौद्धिक जिज्ञासा और अकादमिक अनुशासन पर बल
प्रो. (डॉ.) रीता कुमार, मनोवैज्ञानिक एवं क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट, वरिष्ठ प्रोफेसर, AIPS, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा तथा सलाहकार, स्पीकिंगक्यूब ने संकाय विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शोध अभिरुचि और अकादमिक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संकाय सदस्यों और शोधार्थियों को बौद्धिक जिज्ञासा, अकादमिक अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना के साथ शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
शोध को केवल प्रकाशन तक सीमित न रखने का आह्वान
डॉ. बृज मोहन शर्मा ने कहा कि शोध को केवल शोध-पत्रों के प्रकाशन तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने शोध के व्यापक उद्देश्य और उसके ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी पक्ष पर ध्यान देने का आह्वान किया।
व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में समझाया शोध
उद्घाटन सत्र के बाद “शोध की आधारभूत अवधारणाएँ” विषय पर अकादमिक सत्र आयोजित किया गया। इसका संचालन प्रो. (डॉ.) रीता कुमार ने किया। उन्होंने शोध को एक व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में समझने के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ज्ञान का सृजन, प्रचलित धारणाओं का परीक्षण और विशिष्ट शोध समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करना है।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन स्नेहा भारद्वाज, एचआर एवं कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मेंटल हेल्थ कंसल्टिंग फाउंडेशन, देहरादून के औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कुलपति, संरक्षक, सलाहकारों, विषय विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, आयोजन समिति के सदस्यों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
